आज का ब्लॉग मैं हिन्दी मे लिख रहा हूँ। इसका अंदाज़ा तो आपने लगा लिया होगा कि क्यों मैं आज के दिन, हिंदी मे अपने विचार प्रस्तुत्त कर रहा हूँ। जी हाँ , स्वतंत्र दिवस एक कारण हैं। लेकिन इससे भी बढ़ी वज़ह है कि मैं चाहता हूँ की मेरा यह ब्लॉग ज़्यादा से ज़्यादा लोगो तक पहुंच सके क्योंकि इस ब्लॉग के माध्यम से, भारत में किस तरह स्वतंत्रता पर ग़ैरक़ानूनी तरीके से बाधा डालते है , इस विषय को विस्तार से प्रस्तुत करूँगा । और इस बात का हम तर्क करेंगे की क्या भारत में वाकई ही स्वतंत्रता का लाभ देशवासी उठा पाए है या नहीं।
इस बात का कोई संदेह नहीं है कि भारत ने दुनिया में एक प्रभावशाली छवि स्तापित की है। दुनिया के अनेक देश भारत को एक सहयोगी के रूप में देखते है। उदहारण के तोर पर चीन ले लीजिए। भले ही दोनों देश सीमा की समस्या को लेकर हमेशा मतभेद करते रहते है , लेकिन जब कारोबार का प्रश्न उठता है तो दोनों ही एकजुट हो जाते है। यह इसलिए मुमकिन है क्यूंकि चीन जानता है कि भारत में कारोबार करने के अनेक फायदे हे। और इसका महत्वपूर्ण कारण स्वतंत्रता है। स्वतंत्रता के बाद भारत ने हर क्षेत्र में प्रगति के बीज बोए है । शिक्षा की गुणवत्ता से लेकर कारोबार करने के विभिन्न अवसर , खेती बाड़ी में आधुनिक उपकरणों का उपयोग करने से लेकर जटिल उद्यानों के आगमन तक , स्वतंत्रता ने हर क्षेत्र को मौका दिया है।
इतने सारे फायदे , स्वतंत्रता के बाद , हमे प्राप्त हुए है की हम कुछ समस्याओ को अक्सर अनदेखा कर देते है। कुछ सवालो का जब हम जवाब देने की कोशिश करते है, तब यह सवाल हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या १५ अगस्त ,१९४७ हमें वाकई स्वतंत्रता मिली है या नहीं। सबसे पहला सवाल है कि क्यों आज ,६९ साल बाद, भी हमारे गाँवो में ज़्यादातर बच्चे अशिक्षित रह जाते है। क्या उन बच्चो का कोई हक़ नहीं, शिक्षा प्राप्त करने की ? इस बात का चिंता का विषय यह है कि भारत की अधिकतर संख्या गाओं में बस्ती है। अगर हम ये प्रवृत्ति जारी रखेंगे थो ये भारत के लिए ही हानिकारक साबित होगा क्योंकि बिना शिक्षा के कोई भी देश प्रगति नहीं कर पता है। हाँ , भारत की सरकार ने शहरों में अच्छी शिक्षा प्रदान की हे लेकिन ये अनिवार्य हे क़ि गाँवो में भी प्रधान करे।
और एक सबसे शर्मजनक बात हमारे देश के लिए है, महिलाओ का अनादर। हर रोज़ बलात्कार की खबरें निराशा की भावना उत्पन करती है। कोई राज्य के मंत्री कहते है की महिलाओ को अपने कुछ पोशाक पर पाबंदी रखनी चाहिए , थो कोई मंत्री कहता है की लड़के, लड़के रहेंगे। ये बातें सिर्फ मूर्खता और अनसंवेदनशीलता का उदहारण है। इन सब बेकार की बातो के बजाय , राज्य या केंद्र सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। महिलाओ को भी स्वतंत्रता से जीने का पूरा हक़ है।
सिर्फ भारत में ही नहीं,अनेक देशो में भी स्वतंत्रता के विरुद्ध कदम उठाएं गए है। हाली में बांग्लादेश के धर्म निरपेक्ष ब्लोग्गरों'पर हमले किये गए और दक्षिण कोरिया मे तो पहले से ही कई चीज़ो पर पाबंदी लागू है। मेरा कहने का तात्पर्य यह है की भले ही किसी भी देश को स्वतंत्रता मिल गयी हो ,लेकिन जब तक उस देश के नागरिक अपने तरीके से सोच या विचार को व्यक्त ना कर सके,महिलाओ का अनदर करता जाये , तब तक वह देश पूर्ण स्वंतंत्र नहीं कहलायेगा।